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Showing posts from May, 2022

कनेपी, मुरुगुज़ा और रोला गैरां

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कनेपी, मुरुगुज़ा और रोला गैरां इस्तोनिया की कवियत्री मैरी अंडर अपनी कविता एकस्टेसी(ecstasy)में लिखती हैं -"Why does the blossom wanton in light-The blue horizon lure me to its border?" इसे हिन्दी में ऐसे समझा जा सकता है कि -"फूल रौशनी में क्यूं मुरझाता है-नीला आकाश मुझे अपनी ओर क्यूं बुलाता है? दो बार की ग्रैंडस्लैम चैंपियन स्पेन की मुगुरुज़ा पहला सेट 6-2 से जीत चुकीं थीं।मुगुरुज़ा से खेलते हुए कनेपी पहले सेट में लाल मिट्टी पर पड़ी हुई थीं।दूसरा सेट शुरू होते ही कनेपी के कानों में नीले आकाश का बुलावा गूंज रहा था।कनेपी आगे बढ़ रही थीं।देखते ही देखते कनेपी ने 6-3 से दूसरा सेट अपने नाम कर लिया।अब कनेपी और मुगुरुज़ा की लड़ाई अंतिम पड़ाव पर थी। मुगरुज़ा भी अब स्पेनिश टेनिस पर उतर चुकी थीं। दर्शक भी 'Vamos-मय' होने लगे थे लेकिन कनेपी 'उर्ध्वगामी' होने का मन बना चुकी थीं।साइमन मैथ्यू कोर्ट पर दो घंटे तक चला घमासान समाप्त हो चुका था।कनेपी तीसरा सेट 6-4 से जीतकर नीले आकाश की गोंद में उछल कूद कर रहीं थीं।उनकी रौशनी में आकर मुगुरुज़ा नामक फूल मुरझा चुक...

Federer - इंतिहा हो गई इंतज़ार की

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Federer-इंतिहा हो गई इंतज़ार की ------------------------------------------- ग्रिगर दिमित्रोव जिन्हें ‘ Baby Federer ’ के नाम से जाना जाता है ,कहते हैं, “ मुझे याद है मैं उनके ख़िलाफ़ पहली-पहली बार बोसल ( स्विट्ज़रलैंड) में खेला था। मुझे लगा कि मैंने बहुत अच्छी टेनिस खेली है लेकिन वो ऐसे खिलाड़ी हैं जो बहुत तेज़ी से समय को अपनी ओर बहा ले जाते हैं। वो हमेशा अपने प्रतिद्वंद्वी से एक क़दम आगे रहते हैं। वो अपने खेल को लेकर बहुत स्पष्ट हैं-जो उन्हें बहुत ख़तरनाक बनाता है। मैं जानता हूँ लोग मुझे और उनको तुलनात्मक दृष्टि से देखते हैं लेकिन वो बहुत अलग हैं। वो महानतम हैं। मुझे उम्मीद है वो खेलते रहेंगे…लेकिन बहुत दिनों तक नहीं( हँसते हुए)। 2020 और 2021में फ़ेडरर को चोट ने बिखेर कर रख दिया। ऐसा नहीं है कि फ़ेडरर ने कोशिश नहीं की। उन्होंने फ़्रेंच ओपन खेला-तीसरे दौर तक अविजित भी रहे, लेकिन विम्बलडन को देखते हुए अपने पैर वापस खींच लिए। विम्बलडन में भी जब तक खेले-तब तक बहुत अच्छे लगे,लेकिन घुटने की चोट ने ऐसा परेशान किया कि वापस जाना पड़ा।  अब उनके प्रशंसक उनसे किसी चमत्कार की उम्मीद लगाकर बै...

कार्लोस अलकराज़ गरफ़िया और मैड्रिड ओपन

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कार्लोस अलकराज़ गरफ़िया और Madrid Open कवि नरेश सक्सेना कहते हैं - "इससे पहले कि गिर जाए समूचा वजूद  एकबारगी  तय करो अपना गिरना  अपने गिरने की सही वजह और वक़्त  और गिरो किसी दुश्मन पर  गाज की तरह गिरो  उल्कापात की तरह गिरो  वज्रपात की तरह गिरो" गरफ़िया ऐसी नई उम्र में नडाल और जोकोविच जैसे महारथियों पर उल्कापात की तरह गिरे।दोनों खिलाड़ियों से खेलते हुए उन्होंने ऐसा रण-कौशल दिखाया-प्रशंसक स्तब्ध रह गए। सर्वेश्वर कहते हैं  " ऐसी कोई जगह नहीं जहाँ तुम पहुँच न सको, ऐसा कोई नहीं जो तुम्हें रोक ले। तुम धूल हो पैरों में रौंदी हुई धूल, धूल से मिल जाओ।" नडाल और जोकोविच को हराने के बाद गरफ़िया की प्रतिक्रियाओं को देखिए और धूल हो जाने का मतलब समझिए।यह जानते हुए कि नडाल की नाव को लाल समंदर में पीछे छोड़ना-जग जीतने जैसा है, गरफ़िया शांत रहे।अंतर्मन में जीत जाने का उबाल और चेहरे पर असीम स्थिरता का अभूतपूर्व मिश्रण था। वहीं जोकोविच को जीतने के बाद,अपने बाज़ुओं को स्वछन्दता से फैलने देना-मानो दुनिया को आमंत्रण था कि आओ मेरे गले लग जाओ। गरफ़िया स्पेन...