कनेपी, मुरुगुज़ा और रोला गैरां
कनेपी, मुरुगुज़ा और रोला गैरां इस्तोनिया की कवियत्री मैरी अंडर अपनी कविता एकस्टेसी(ecstasy)में लिखती हैं -"Why does the blossom wanton in light-The blue horizon lure me to its border?" इसे हिन्दी में ऐसे समझा जा सकता है कि -"फूल रौशनी में क्यूं मुरझाता है-नीला आकाश मुझे अपनी ओर क्यूं बुलाता है? दो बार की ग्रैंडस्लैम चैंपियन स्पेन की मुगुरुज़ा पहला सेट 6-2 से जीत चुकीं थीं।मुगुरुज़ा से खेलते हुए कनेपी पहले सेट में लाल मिट्टी पर पड़ी हुई थीं।दूसरा सेट शुरू होते ही कनेपी के कानों में नीले आकाश का बुलावा गूंज रहा था।कनेपी आगे बढ़ रही थीं।देखते ही देखते कनेपी ने 6-3 से दूसरा सेट अपने नाम कर लिया।अब कनेपी और मुगुरुज़ा की लड़ाई अंतिम पड़ाव पर थी। मुगरुज़ा भी अब स्पेनिश टेनिस पर उतर चुकी थीं। दर्शक भी 'Vamos-मय' होने लगे थे लेकिन कनेपी 'उर्ध्वगामी' होने का मन बना चुकी थीं।साइमन मैथ्यू कोर्ट पर दो घंटे तक चला घमासान समाप्त हो चुका था।कनेपी तीसरा सेट 6-4 से जीतकर नीले आकाश की गोंद में उछल कूद कर रहीं थीं।उनकी रौशनी में आकर मुगुरुज़ा नामक फूल मुरझा चुक...