कार्लोस अलकराज़ गरफ़िया और मैड्रिड ओपन

कार्लोस अलकराज़ गरफ़िया और Madrid Open

कवि नरेश सक्सेना कहते हैं -
"इससे पहले कि गिर जाए समूचा वजूद 
एकबारगी 
तय करो अपना गिरना 
अपने गिरने की सही वजह और वक़्त 
और गिरो किसी दुश्मन पर 
गाज की तरह गिरो 
उल्कापात की तरह गिरो 
वज्रपात की तरह गिरो"

गरफ़िया ऐसी नई उम्र में नडाल और जोकोविच जैसे महारथियों पर उल्कापात की तरह गिरे।दोनों खिलाड़ियों से खेलते हुए उन्होंने ऐसा रण-कौशल दिखाया-प्रशंसक स्तब्ध रह गए।

सर्वेश्वर कहते हैं 
" ऐसी कोई जगह नहीं
जहाँ तुम पहुँच न सको,
ऐसा कोई नहीं
जो तुम्हें रोक ले।
तुम धूल हो
पैरों में रौंदी हुई धूल,
धूल से मिल जाओ।"

नडाल और जोकोविच को हराने के बाद गरफ़िया की प्रतिक्रियाओं को देखिए और धूल हो जाने का मतलब समझिए।यह जानते हुए कि नडाल की नाव को लाल समंदर में पीछे छोड़ना-जग जीतने जैसा है, गरफ़िया शांत रहे।अंतर्मन में जीत जाने का उबाल और चेहरे पर असीम स्थिरता का अभूतपूर्व मिश्रण था।

वहीं जोकोविच को जीतने के बाद,अपने बाज़ुओं को स्वछन्दता से फैलने देना-मानो दुनिया को आमंत्रण था कि आओ मेरे गले लग जाओ।

गरफ़िया स्पेन के राष्ट्रवाक्य Plus Ultra (further beyond)का अनुवाद जान पड़ते हैं।जड़ से जड़तम दृष्टिकोण से भी देखें तो-लाल मिट्टी पर राफ़ा और जोकोविच को हराना'और आगे' जाने जैसा ही होगा।

-उत्कर्ष





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