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Showing posts from July, 2022

नीरज// फूल खिला है

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Notes- नीरज// फूल खिला है नीरज का हिंदी शब्दकोश में अर्थ है - जल में जन्म लेने वाला अर्थात् कमल। नीरज का एक और अर्थ यह भी है - 'बिना किसी लाभ की इच्छा लिए जन्म लेने वाला'। नीरज के और भी अर्थ होंगे। लेकिन पिछ्ले दो सालों में इस शब्द ने अपने अलग अर्थ स्थापित किए हैं। भारतीय जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने इस शब्द को अपने खेल से मथ दिया है। नीरज बिजली की गति से भागते हैं, चीते सी उछाल लगाते हैं और पलक झपकते ही उनका भाला दर्शकों की नज़रों से दूर पहुंँच जाता है। भाला जितनी बार हवा में जाता है, नीरज नाम के नए नए प्रतिमान बनने शुरू हो जाते हैं। क्रिकेट से रंगे हुए हिन्दुस्तान में, नीरज जैवलिन थ्रोइंग के ब्रांड एंबेसडर बनकर उभरे हैं। नीरज चोपड़ा ने एक नए रिकॉर्ड के साथ विश्व चैंपियन शिप में रजत पदक जीता है। फिलहाल नीरज एक हल्की सी चोट से जूझ रहे हैं और इन राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा नहीं लेंगे। यह लिख पाने का अनुभव कितना सुखद है कि जैवलिन थ्रोअर नीरज के न होने से ट्रैक न फ़ील्ड इवेंट में भारत का एक निश्चित पदक किसी दूसरे देश की झोली में जाएगा । हिंदुस्तानी खेल प्रशंसक के ल...

e-Sports : The Change Is Here

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किसी व्यक्ति विशेष के संदर्भ में, बदलाव को स्वीकार न करना रूढ़िवादिता की सरलतम परिभाषा है। जमे रहना रूढ़िवादिता का सबसे बड़ा प्रतीक है। बदलाव के बारे में सबसे ख़ास बात यह है कि इसको अपनी दशा प्राप्त करने में समय लगता है लेकिन यह अतिरेक प्राप्त करके ही दम लेता है। एक पूरी पीढ़ी का एक क़दम दूसरी पीढ़ी के लिए बदलाव के रास्ते खोलता है। उसी पीढ़ी के कुछ जमे हुए लोग बढ़ते हुए क़दम को पीछे खींचते हैं। इतिहास ऐसे लोगों को मुआफ़ नहीं करता है। अगली पीढ़ी जब ऐसे लोगों से सवाल करती है तब वे भी ख़ुद को मुआफ़ नहीं कर पाते हैं। हर पिछली पीढ़ी को लगता है कि उन्हें बदलाव को रोकना ही चाहिए और वो बदलाव को रोक सकते हैं। लेकिन चेंज कॉन्स्टेंट हैं। होकर रहता है। होकर ही रहता है। मोबाईल गेमिंग और कंप्यूटर गेमिंग का इतिहास लगभग 20 साल पुराना है। भारत में इंटरनेट ने पिछले 6-7 सालों में तेज़ी से अपने पांँव पसारे हैं। मोबाइल और कम्प्यूटर गेमिंग जब इंटरनेट की मदद से रियल टाइम में होने लगी तो इसे ई - गेमिंग कहा गया। हालांकि ई को कुछ कुछ जगहों पर इलेक्ट्रानिक शब्द से भी जोड़कर देखा जाता है। ई -गेमिंग को...

कोहली: एक अकाट्य तर्क

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कोहली: एक अकाट्य तर्क  ------------------- बादल अच्छे भले सूरज को क़ैद कर लेते हैं। तीरगी घनी हो तो तेज़ चमकते हुए सितारे रौशनी की गुहार लगाते हैं। नदी का पानी जलने लगे तो अच्छी भली मछलियांँ पानी - पानी हो जाती हैं। हवा बहुत तेज़ चलने लगे तो बड़े बड़े पंछी आसमान छोड़कर हवा हो जाते हैं। समय की धार उलट जाए तो महामानव तक के पसीने आ जाते हैं। कहने का अर्थ यह कि प्रतिकूलता सब पर एक तरह का असर डालती है। सबको सोचने पर विवश करती है। तोड़ कर रख देती है। कभी कभी तो बिल्कुल शून्य कर देती है। कोहली इस समय प्रतिकूलता के चक्र में हैं। समय उनके गुण और संयम की परीक्षा ले रहा है। वो भली भांति इस परीक्षा में रत हैं। लगातार कोशिश कर रहे हैं। कुछ लोगों का मानना है कि वो लय में नहीं हैं - उनकी लय जा चुकी है - उनमें अब वो वाली बात नहीं रही - उनमें अब बहुत ज़्यादा क्रिकेट नहीं रही वगै़रहा, वगै़रहा। मुझे इनमें से कोई भी व्याख्या सम्पूर्ण नहीं लगती है। जिस कोहली को मैं जानता हूंँ वो अपने लिए ख़ुद कठिन रास्ते चुनता है ताकि वो और बेहतर बन सके। आप पिछले दो सालों में भारतीय टीम मैनेजमेंट का रवैया द...

बदलते हुए किरियस

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बदलते हुए किरियस ------------------------------------------------------------------  जैसे कोई शोर मचाता हुआ, हंँसता-गाता हुआ, इधर से उधर दौड़ लगाता हुआ, उधम मचाता हुआ, पटकता- तोड़ता हुआ बच्चा बड़ा हो जाए, जैसे हिलोरे मारती हुई - उफनती हुई नदी समंदर में मिल जाने के बाद शान्त हो जाए, जैसे अचानक उठने वाली आंँधी धीरे धीरे दायम हवा की शक्ल में बदल जाए - लगभग 10 साल की प्रोफ़ेशनल टेनिस के बाद निक किरियस भी अपने होने में सबसे बेहतर हो रहे हैं। इतनी प्रतिभा होने के बावजूद निक को इतना पीछे देखना दुःखी कर देता था।उनका ऑन कोर्ट अप्रोच काफ़ी बचकाना रहता था।   कई लोगों का मानना है कि उनकी टेनिस का सारा दृष्टिकोण एंजॉय करने के आस पास का है, लेकिन यह उनका भ्रम है। मेरा हमेशा से यह मानना रहा है कि खेल और खिलाड़ी एक दूसरे को चुनते हैं। निक किरियस ने टेनिस को और टेनिस ने निक किरियस को चुना है। अव्वल तो यह कि किसी भी स्पोर्ट्स को उसके पसंद करने वालों के लिए खेलना उसमें जीतने से बड़ा दर्जा है, जो निक सालों से करते आ रहे हैं। दूसरा यह कि वो भी ग्रैंडस्लैम जीतना चाहते होंगे, वो भी चाहत...