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Showing posts from 2022

म्बापे, नोवाक और रोजर

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1) अभ्यस्त - किलियन म्बापे प्रकृति अदृश्य होते हुए भी दृश्यमान है। इसके कई घटक है, जिनमें इंसान सबसे अधिक मूर्त है। प्रकृति इंसान को अपनी गोंद में पालती है, अपने सीने पर चलने का अभ्यास कराती है और अपने आकाश में उड़ने का अवसर करती है। इंसानी दृष्टिकोण से, इन तीनों क्रियाओं में द्वितीय क्रिया सबसे अधिक आवश्यक और तृतीय सबसे अधिक आंदोलन पूर्ण है। प्रथम क्रिया को मूल अधिकार की श्रेणी में रखना उचित होगा। म्बापे ने द्वितीय और तृतीय क्रिया को अपनी दिनचर्या में समो लिया है। चलने का अभ्यास निरंतर करते रहने से अब वो दौड़ने लगे हैं और लगातार दौड़ते रहने से, पृथ्वी का खुला मैदान उनके लिए आकाश हो गया है। ज़मीन पर बराबर क़दम रखते हुए भी उड़ा जा सकता है, म्बापे इस सूत्र के प्रवर्तक बनकर उभरे हैं। 2) चमचमाता हुआ देवता : रोजर फ़ेडरर संभव है कि हमारे लिए किसी देवता की कल्पना करना मुश्किल कार्य होता, लेकिन हम भाग्यशाली हैं कि हमारे पास रोजर हैं। घुंँघराले बाल, तेज़ चमकता माथा, लम्बे हाथ, गठीले पैर और सुडौल कंधो से लगी हुई एक लम्बी गर्दन - मूर्तिकार देवताओं को ऐसी ही शारीरिक बनावट प...

स्वप्न, प्रकृति, जीवन, यात्राएंँ और यह फ़ाइनल

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स्वप्न, प्रकृति, जीवन, यात्राएंँ और यह फ़ाइनल  1) स्वप्न' ऐसे शब्द को अर्थ देने के लिए कितनी लंबी यात्राएंँ करनी पड़ती है। कितने पहाड़ चढ़ने होते हैं। कितनी नदियों में उतरना होता है। हिंदी शब्दकोष में शायद ही कोई दूसरा शब्द हो जिसको अर्थ देने में इतनी साधना लगे। परिस्थितियों में असमानताओं के बावजूद, मेस्सी की यात्रा को पेले के समकक्ष रखना अनुचित न होगा। 2) प्रकृति का हर अवयव समान रूप से दर्शनीय है। उजले और उदास दोनों तरह के अवयवों में अद्वितीय मौलिक सुंदरता निहित है। किंतु प्रकृति के कुछ अवयव वाद - विवाद और वर्गीकरण की सीमा से परे हैं। मेस्सी और रोनाल्डो उन्हीं अवयवों में से हैं।  3) जीवन में गति न हो तो मृत्यु बहलाने लगती है। गति अधिक हो तो जीवन मृत्यु के चक्र से बाहर निकल जाता है। जीत जाना या जीतते रहना अगर जीवन है और हार जाना या हारते रहना मृत्यु तो मबापे कहांँ हैं? सारी परिभाषाएंँ पाठक मन की विवेचना पर आश्रित हैं। मुझे भ्रम है कि म्बापे जीवन का सबसे सटीक विंब न हों, गतिमान होते हुए स्थैतिक और स्थैतिक होते हुए गतिमान।  4) जीवन भी 1...

"So many things are possible as long as you don't know they are impossible."

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"So many things are possible as long as you don't know they are impossible." - Mildred D. Taylor A very fine line between Hope and Fear is called possibility. A perfect mixture of defined hope and positive fear make possibility breath. Somewhere Every sports is 'Emily Dickinson' singing 'I dwell in possibility'. Every existing sports takes its dips into the deepest ocean of possibilities. Possibility nutures them, feeds them and keeps them alive and vice versa*.( *Newton's 3rd law is universal) This T 20 world cup is full of possibilities. We have come across many results that we were not hoping of. Ireland and Zimbabwe's journey to Main Round, The exit of Two Time World Champions Windies, The Blackcaps win over Aussies and The Famous Irish Victory over British are some of Them. This tournament is just started. Many tales are yet to come. The 1st round has showcased us every possible aspects of the game. The Final round is still on. We ...

रोजर के नाम पाती

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प्रिय रोजर,  तुम कभी मेरे घर नहीं आए। दिल में रहे, दिमाग़ में रहे लेकिन घर कभी नहीं आए। मेरा गांँव में 8 कमरे का घर है। पापा ने अपनी कमाई से बनाया है। कुछ दीवारों से पेंट जा रहा है। कहीं कहीं फर्श से पलस्तर छूट गया है। कहीं कहीं छत से पानी रिसता है। घर के सामने एक नीम का पेड़ है। और उसकी छांव में इतनी जगह कि एक टेनिस कोर्ट बन जाए।  तुम घर आते तो मम्मी से कहकर उनके हाथ के पराठे, पापा से उनके हाथ का मीट और भैया से उनके हाथ का चिकन, अपने हाथों से खिलाता। तुम्हें पापा की खेती दिखाता। उनकी गौशाला में भी ज़रूर लेकर जाता और उनके स्कूल, स्कूल भी - लेकिन तुम नहीं आए, कभी नहीं आए।    आते भी कैसे? तुम तो मेरे जैसे लाखों के लिए कोर्ट में दौड़ रहे थे। तुम तो बता रहे थे कि खिलाड़ी होने के क्या मायने हैं। लेकिन अब तो तुम टेनिस भी छोड़ रहे हो। अब तो आओगे न?  क्यूंँ आऊंँ? यह कैसा सवाल है? माफ़ करना मैं चिल्ला रहा हूंँ। अरे! सांँस शरीर से, जल प्यासे से, हवा पत्तों से आने की वज्ह पूछकर आते हैं? तुम्हारा आना मुझे जीवनमय कर देगा इसलिए आ जाओ। तुम आओगे तो सजीव हो उठूंँगा इ...

बनती हुई कहानियांँ

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"After nourishment, shelter and companionship, stories are the thing we need most in the world." (Philip Pullman) हम सब कहानियांँ सुनकर बड़े हुए हैं। हर कहानी में एक नायक होता है। कुछ कहानियों में कई नायक होते हैं। तमाम मुश्किलों से गुज़रते हुए नायक अपनी मंज़िल पर पहुँचते हैं। हम उन सभी नायकों से जाने अनजाने में कुछ न कुछ सीखते आए हैं। आँखें खोलकर देखेंगे तो यह खुलेगा कि कुछ कहानियांँ हमारे आस पास बन रही हैं। अगली पीढ़ी की नींद इन पर मुनहसिर है। हमें इन कहानियों को अपने अपने लफ़्ज़ों से गढ़ना है। अपनी अपनी स्मृतियों में बचाए रखना है। स्पेन के 19 वर्षीय कार्लोस अल्कराज़ का यह US Open Run एक कहानी हो सकती है। श्रीलंका का एशिया कप Run भी एक शानदार कहानी हो सकती है। हमें इन सबको बख़ूबी याद रखना है। अपने शब्द देने हैं ताकि अगली पीढ़ी को अच्छी कहानी सुनकर अच्छी नींद आए। पहले बात अल्कराज़ की करते हैं। अल्कराज़ ने टेनिस के दरवाज़े पर दस्तक दे दी है। पिछ्ले 4 सालों से अल्कराज़ का नाम चर्चा में था। 2020, 2021 अल्कराज़ के लिए आम साल रहे। लेकिन 2022 में अल्कराज़ अपने खेल को बहुत ऊपर ले ...

धोनी को देखते हुए - 2

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धोनी को देखते हुए - 2 ------------------------------------------ तूर इस्लामिक माइथालजी में एक पहाड़ है। कहते हैं प्रोफेट मूसा ईश्वर को देखने की ज़िद करते हैं। ईश्वर उनको दर्शन देने आते हैं। लेकिन उनकी आभा देखकर मूसा की आंँखे चौंधिया जाती हैं और साथ ही साथ ईश्वर की आभा से तूर भी जल जाता है।  धोनी में ईश्वरीय आभा है। जिसका अनुभव करने के लिए तीसरी, चौथी या पांँचवी आंँख का होना आवश्यक है। विकेट के पीछे तेज़ हाथों को देख पाने की क़ुव्वत कैमरे के इलावा किस के पास है! विकेट के बीच या मैदान में दौड़ते हुए उनकी रफ़्तार को नाप पाने का काम मशीनों के इलावा और कौन कर सकता है! लोअर ऑर्डर के साथ बल्लेबाज़ी करने का ऐसा बेजोड़ फन उनके इलावा और कौन इख़्तियार कर सकता है। विज्ञान और तमाम वैज्ञानिक यंत्रों का भला हो जिन्होंने हमें धोनी को देखने में मदद की। ये यंत्र हम सभी मूसाओं की तीसरी, चौथी और पांचवी आंँख बने, बाक़ी दो चौंधियाने के बावजूद हम उन्हें देखने में सफल रहे।  धोनी को लेकर पहली याद बड़े बालों से जुड़ी हुई है। नया नया सा बड़े बालों वाला लड़का हाथों में दस्ताने और चेहरे पर मुस...

नीरज// फूल खिला है

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Notes- नीरज// फूल खिला है नीरज का हिंदी शब्दकोश में अर्थ है - जल में जन्म लेने वाला अर्थात् कमल। नीरज का एक और अर्थ यह भी है - 'बिना किसी लाभ की इच्छा लिए जन्म लेने वाला'। नीरज के और भी अर्थ होंगे। लेकिन पिछ्ले दो सालों में इस शब्द ने अपने अलग अर्थ स्थापित किए हैं। भारतीय जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने इस शब्द को अपने खेल से मथ दिया है। नीरज बिजली की गति से भागते हैं, चीते सी उछाल लगाते हैं और पलक झपकते ही उनका भाला दर्शकों की नज़रों से दूर पहुंँच जाता है। भाला जितनी बार हवा में जाता है, नीरज नाम के नए नए प्रतिमान बनने शुरू हो जाते हैं। क्रिकेट से रंगे हुए हिन्दुस्तान में, नीरज जैवलिन थ्रोइंग के ब्रांड एंबेसडर बनकर उभरे हैं। नीरज चोपड़ा ने एक नए रिकॉर्ड के साथ विश्व चैंपियन शिप में रजत पदक जीता है। फिलहाल नीरज एक हल्की सी चोट से जूझ रहे हैं और इन राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा नहीं लेंगे। यह लिख पाने का अनुभव कितना सुखद है कि जैवलिन थ्रोअर नीरज के न होने से ट्रैक न फ़ील्ड इवेंट में भारत का एक निश्चित पदक किसी दूसरे देश की झोली में जाएगा । हिंदुस्तानी खेल प्रशंसक के ल...

e-Sports : The Change Is Here

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किसी व्यक्ति विशेष के संदर्भ में, बदलाव को स्वीकार न करना रूढ़िवादिता की सरलतम परिभाषा है। जमे रहना रूढ़िवादिता का सबसे बड़ा प्रतीक है। बदलाव के बारे में सबसे ख़ास बात यह है कि इसको अपनी दशा प्राप्त करने में समय लगता है लेकिन यह अतिरेक प्राप्त करके ही दम लेता है। एक पूरी पीढ़ी का एक क़दम दूसरी पीढ़ी के लिए बदलाव के रास्ते खोलता है। उसी पीढ़ी के कुछ जमे हुए लोग बढ़ते हुए क़दम को पीछे खींचते हैं। इतिहास ऐसे लोगों को मुआफ़ नहीं करता है। अगली पीढ़ी जब ऐसे लोगों से सवाल करती है तब वे भी ख़ुद को मुआफ़ नहीं कर पाते हैं। हर पिछली पीढ़ी को लगता है कि उन्हें बदलाव को रोकना ही चाहिए और वो बदलाव को रोक सकते हैं। लेकिन चेंज कॉन्स्टेंट हैं। होकर रहता है। होकर ही रहता है। मोबाईल गेमिंग और कंप्यूटर गेमिंग का इतिहास लगभग 20 साल पुराना है। भारत में इंटरनेट ने पिछले 6-7 सालों में तेज़ी से अपने पांँव पसारे हैं। मोबाइल और कम्प्यूटर गेमिंग जब इंटरनेट की मदद से रियल टाइम में होने लगी तो इसे ई - गेमिंग कहा गया। हालांकि ई को कुछ कुछ जगहों पर इलेक्ट्रानिक शब्द से भी जोड़कर देखा जाता है। ई -गेमिंग को...

कोहली: एक अकाट्य तर्क

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कोहली: एक अकाट्य तर्क  ------------------- बादल अच्छे भले सूरज को क़ैद कर लेते हैं। तीरगी घनी हो तो तेज़ चमकते हुए सितारे रौशनी की गुहार लगाते हैं। नदी का पानी जलने लगे तो अच्छी भली मछलियांँ पानी - पानी हो जाती हैं। हवा बहुत तेज़ चलने लगे तो बड़े बड़े पंछी आसमान छोड़कर हवा हो जाते हैं। समय की धार उलट जाए तो महामानव तक के पसीने आ जाते हैं। कहने का अर्थ यह कि प्रतिकूलता सब पर एक तरह का असर डालती है। सबको सोचने पर विवश करती है। तोड़ कर रख देती है। कभी कभी तो बिल्कुल शून्य कर देती है। कोहली इस समय प्रतिकूलता के चक्र में हैं। समय उनके गुण और संयम की परीक्षा ले रहा है। वो भली भांति इस परीक्षा में रत हैं। लगातार कोशिश कर रहे हैं। कुछ लोगों का मानना है कि वो लय में नहीं हैं - उनकी लय जा चुकी है - उनमें अब वो वाली बात नहीं रही - उनमें अब बहुत ज़्यादा क्रिकेट नहीं रही वगै़रहा, वगै़रहा। मुझे इनमें से कोई भी व्याख्या सम्पूर्ण नहीं लगती है। जिस कोहली को मैं जानता हूंँ वो अपने लिए ख़ुद कठिन रास्ते चुनता है ताकि वो और बेहतर बन सके। आप पिछले दो सालों में भारतीय टीम मैनेजमेंट का रवैया द...

बदलते हुए किरियस

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बदलते हुए किरियस ------------------------------------------------------------------  जैसे कोई शोर मचाता हुआ, हंँसता-गाता हुआ, इधर से उधर दौड़ लगाता हुआ, उधम मचाता हुआ, पटकता- तोड़ता हुआ बच्चा बड़ा हो जाए, जैसे हिलोरे मारती हुई - उफनती हुई नदी समंदर में मिल जाने के बाद शान्त हो जाए, जैसे अचानक उठने वाली आंँधी धीरे धीरे दायम हवा की शक्ल में बदल जाए - लगभग 10 साल की प्रोफ़ेशनल टेनिस के बाद निक किरियस भी अपने होने में सबसे बेहतर हो रहे हैं। इतनी प्रतिभा होने के बावजूद निक को इतना पीछे देखना दुःखी कर देता था।उनका ऑन कोर्ट अप्रोच काफ़ी बचकाना रहता था।   कई लोगों का मानना है कि उनकी टेनिस का सारा दृष्टिकोण एंजॉय करने के आस पास का है, लेकिन यह उनका भ्रम है। मेरा हमेशा से यह मानना रहा है कि खेल और खिलाड़ी एक दूसरे को चुनते हैं। निक किरियस ने टेनिस को और टेनिस ने निक किरियस को चुना है। अव्वल तो यह कि किसी भी स्पोर्ट्स को उसके पसंद करने वालों के लिए खेलना उसमें जीतने से बड़ा दर्जा है, जो निक सालों से करते आ रहे हैं। दूसरा यह कि वो भी ग्रैंडस्लैम जीतना चाहते होंगे, वो भी चाहत...

बची रहेगी मानव सभ्यता,किसी एक खेल के बचे रहने से

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कहने को श्रीलंका चारो तरफ़ से समुद्र से घिरा है।किसी भी राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए राज्य का समुद्र से घिरा होना चारो हाथ घी में होने जैसा है।लेकिन श्रीलंका के साथ ऐसा नहीं है।अर्थव्यवस्था की नाव बीच समंदर में हो तो अच्छा रहता है।लेकिन राजनीति की अल्प इच्छाशक्ति ने श्रीलंका को नाव को किनारे ला दिया है।सुनने में अजीब है लेकिन यहांँ की जनता बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं का गला घोंट कर अपने लिए जीवन बचा रही है। कल ऑस्ट्रेलियाई पुरूष क्रिकेट टीम ने अपने श्रीलंकाई दौरे का आख़िरी मैच खेला।जैसे तैसे यह मैच वे जीत गए लेकिन श्रृंखला 2-3 से श्रीलंका के नाम रही।श्रृंखला ऐतिहासिक रही और श्रीलंका अरसे बाद एक टीम के रूप में ख़ुद को दर्ज करने में कामयाब रही। सब कुछ सामान्य रहा लेकिन एक घटना ने या यों कहे एक प्रक्रिया ने पूरी दुनिया को आर प्रेमदासा स्टेडियम की ओर खींच लिया।आर प्रेमदासा स्टेडियम कहीं पूरा नीला तो कहीं पूरा पीला तो कहीं हल्का हरा दिखाई दे रहा था।किसी ने नीले समंदर को गहरी पीली नदी से जोड़ दिया था।श्रीलंकाई समर्थक बड़े बड़े पीले बैनरों पर संदेश लिख कर लाए थे।उन पर गाढ़े न...

VAMOS RAFA (Let's Go Rafa)

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स्पैनिश में एक कथन है - "El Hombre Que Se Levanta Es Aún Más Grande Que El Que No Ha Caído " इसका हिंदी अनुवाद यह है कि "गिरकर खड़ा होने वाला इन्सान कभी न गिरने वाले इन्सान से महान है।" आज से 26 दिन पहले,6 मई को राफेल नडाल मैड्रिड ओपेन का क्वार्टर फ़ाइनल खेलते हैं।जहाँ उनके उत्तराधिकारी कार्लोस अलकराज उन्हें आसानी से हरा देते हैं। आज से 20 दिन पहले,12 मई को नडाल रोम मास्टर्स का राउंड ऑफ़ 16 मैच खेलते हैं।जहाँ कनाडा के शापावलोव उन्हें हरा देते हैं।और तो और दूसरे सेट के दौरान नडाल लडखड़ाते हुए भी देखे जाते हैं। मैच के बाद प्रेस कांफ्रेंस होती है।नडाल से सवाल किया जाता है - "फ्रेंच ओपन सामने है!आज आप 'complete' नहीं दिखे।क्या आप इंजर्ड हैं?" नडाल जवाब देते हैं , "देखिए ! मैं इंजर्ड नहीं हूँ।मैं तो ऐसा खिलाड़ी हूँ जो इंजरी के साथ जी रहा है।और जहाँ तक फ्रेंच ओपन की बात है तो मैं इतना ही कहूँगा कि वो मेरे लिए बहुत ज़रूरी है और मैं अपनी तरफ़ से कोई कसर नहीं छोडूँगा।" 29 मई,राफेल नडाल फ्रेंच ओपन के चौथे दौर में आगर अल असीमी के साथ खे...

कनेपी, मुरुगुज़ा और रोला गैरां

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कनेपी, मुरुगुज़ा और रोला गैरां इस्तोनिया की कवियत्री मैरी अंडर अपनी कविता एकस्टेसी(ecstasy)में लिखती हैं -"Why does the blossom wanton in light-The blue horizon lure me to its border?" इसे हिन्दी में ऐसे समझा जा सकता है कि -"फूल रौशनी में क्यूं मुरझाता है-नीला आकाश मुझे अपनी ओर क्यूं बुलाता है? दो बार की ग्रैंडस्लैम चैंपियन स्पेन की मुगुरुज़ा पहला सेट 6-2 से जीत चुकीं थीं।मुगुरुज़ा से खेलते हुए कनेपी पहले सेट में लाल मिट्टी पर पड़ी हुई थीं।दूसरा सेट शुरू होते ही कनेपी के कानों में नीले आकाश का बुलावा गूंज रहा था।कनेपी आगे बढ़ रही थीं।देखते ही देखते कनेपी ने 6-3 से दूसरा सेट अपने नाम कर लिया।अब कनेपी और मुगुरुज़ा की लड़ाई अंतिम पड़ाव पर थी। मुगरुज़ा भी अब स्पेनिश टेनिस पर उतर चुकी थीं। दर्शक भी 'Vamos-मय' होने लगे थे लेकिन कनेपी 'उर्ध्वगामी' होने का मन बना चुकी थीं।साइमन मैथ्यू कोर्ट पर दो घंटे तक चला घमासान समाप्त हो चुका था।कनेपी तीसरा सेट 6-4 से जीतकर नीले आकाश की गोंद में उछल कूद कर रहीं थीं।उनकी रौशनी में आकर मुगुरुज़ा नामक फूल मुरझा चुक...

Federer - इंतिहा हो गई इंतज़ार की

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Federer-इंतिहा हो गई इंतज़ार की ------------------------------------------- ग्रिगर दिमित्रोव जिन्हें ‘ Baby Federer ’ के नाम से जाना जाता है ,कहते हैं, “ मुझे याद है मैं उनके ख़िलाफ़ पहली-पहली बार बोसल ( स्विट्ज़रलैंड) में खेला था। मुझे लगा कि मैंने बहुत अच्छी टेनिस खेली है लेकिन वो ऐसे खिलाड़ी हैं जो बहुत तेज़ी से समय को अपनी ओर बहा ले जाते हैं। वो हमेशा अपने प्रतिद्वंद्वी से एक क़दम आगे रहते हैं। वो अपने खेल को लेकर बहुत स्पष्ट हैं-जो उन्हें बहुत ख़तरनाक बनाता है। मैं जानता हूँ लोग मुझे और उनको तुलनात्मक दृष्टि से देखते हैं लेकिन वो बहुत अलग हैं। वो महानतम हैं। मुझे उम्मीद है वो खेलते रहेंगे…लेकिन बहुत दिनों तक नहीं( हँसते हुए)। 2020 और 2021में फ़ेडरर को चोट ने बिखेर कर रख दिया। ऐसा नहीं है कि फ़ेडरर ने कोशिश नहीं की। उन्होंने फ़्रेंच ओपन खेला-तीसरे दौर तक अविजित भी रहे, लेकिन विम्बलडन को देखते हुए अपने पैर वापस खींच लिए। विम्बलडन में भी जब तक खेले-तब तक बहुत अच्छे लगे,लेकिन घुटने की चोट ने ऐसा परेशान किया कि वापस जाना पड़ा।  अब उनके प्रशंसक उनसे किसी चमत्कार की उम्मीद लगाकर बै...

कार्लोस अलकराज़ गरफ़िया और मैड्रिड ओपन

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कार्लोस अलकराज़ गरफ़िया और Madrid Open कवि नरेश सक्सेना कहते हैं - "इससे पहले कि गिर जाए समूचा वजूद  एकबारगी  तय करो अपना गिरना  अपने गिरने की सही वजह और वक़्त  और गिरो किसी दुश्मन पर  गाज की तरह गिरो  उल्कापात की तरह गिरो  वज्रपात की तरह गिरो" गरफ़िया ऐसी नई उम्र में नडाल और जोकोविच जैसे महारथियों पर उल्कापात की तरह गिरे।दोनों खिलाड़ियों से खेलते हुए उन्होंने ऐसा रण-कौशल दिखाया-प्रशंसक स्तब्ध रह गए। सर्वेश्वर कहते हैं  " ऐसी कोई जगह नहीं जहाँ तुम पहुँच न सको, ऐसा कोई नहीं जो तुम्हें रोक ले। तुम धूल हो पैरों में रौंदी हुई धूल, धूल से मिल जाओ।" नडाल और जोकोविच को हराने के बाद गरफ़िया की प्रतिक्रियाओं को देखिए और धूल हो जाने का मतलब समझिए।यह जानते हुए कि नडाल की नाव को लाल समंदर में पीछे छोड़ना-जग जीतने जैसा है, गरफ़िया शांत रहे।अंतर्मन में जीत जाने का उबाल और चेहरे पर असीम स्थिरता का अभूतपूर्व मिश्रण था। वहीं जोकोविच को जीतने के बाद,अपने बाज़ुओं को स्वछन्दता से फैलने देना-मानो दुनिया को आमंत्रण था कि आओ मेरे गले लग जाओ। गरफ़िया स्पेन...