धोनी को देखते हुए - 2




धोनी को देखते हुए - 2
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तूर इस्लामिक माइथालजी में एक पहाड़ है। कहते हैं प्रोफेट मूसा ईश्वर को देखने की ज़िद करते हैं। ईश्वर उनको दर्शन देने आते हैं। लेकिन उनकी आभा देखकर मूसा की आंँखे चौंधिया जाती हैं और साथ ही साथ ईश्वर की आभा से तूर भी जल जाता है। 

धोनी में ईश्वरीय आभा है। जिसका अनुभव करने के लिए तीसरी, चौथी या पांँचवी आंँख का होना आवश्यक है। विकेट के पीछे तेज़ हाथों को देख पाने की क़ुव्वत कैमरे के इलावा किस के पास है! विकेट के बीच या मैदान में दौड़ते हुए उनकी रफ़्तार को नाप पाने का काम मशीनों के इलावा और कौन कर सकता है! लोअर ऑर्डर के साथ बल्लेबाज़ी करने का ऐसा बेजोड़ फन उनके इलावा और कौन इख़्तियार कर सकता है।

विज्ञान और तमाम वैज्ञानिक यंत्रों का भला हो जिन्होंने हमें धोनी को देखने में मदद की। ये यंत्र हम सभी मूसाओं की तीसरी, चौथी और पांचवी आंँख बने, बाक़ी दो चौंधियाने के बावजूद हम उन्हें देखने में सफल रहे। 

धोनी को लेकर पहली याद बड़े बालों से जुड़ी हुई है। नया नया सा बड़े बालों वाला लड़का हाथों में दस्ताने और चेहरे पर मुस्कान पहने आता है। विकेटकीपिंग की नई परिभाषाएंँ गढ़ता है। बल्लेबाज़ी करने आता है तो छक्कों को नए आहंग, नए ढंग से भर देता है। कप्तानी पर आए तो अनसुनी पहेलियों से विपक्षी टीम को उलझा देता है।

धोनी छोटे शहरों का प्रतिनिधि है। धोनी भारी सपनों को ढो रही हर एक आंँख का अतिरेक है। धोनी जैसे अजीबो ग़रीब लोगों का सबसे साफ़ सुथरा रूप। धोनी जैसे आसमान के दामन पर एक बहुरंगी तारा। धोनी जैसे पानी की सबसे ज़रूरी बूंँद। धोनी जैसे ' दरख़्त ए जर्द पे जैसे हरा चमकता है'।

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