खेल विषयक


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1)- विश्व सकारात्मक प्रतिरोध की उपमाओं से पटा पड़ा है। खेलों की दुनिया में भी इसकी अनेकों उपमाएंँ हैं - लेकिन द्रविड़ से सुंदर कोई नहीं। 

2)- दर्शक कई भावों जैसे सुख, संतुष्टि और आश्चर्य को महसूस करने के लिए खेलों को देखते हैं - फॉलो करते हैं। जबकि सुखद आश्चर्य से संतुष्टि मिलना इन सभी भावों की सबसे पकी हुई और सबसे अद्भुत अनुभूति है। सूर्य कुमार यादव ने इस अनुभूति को उन के लिए सामान्य कर दिया है। 

3)- कोहली क्रिकेट की सभागार में बल्लेबाज़ी विषय पर रखा हुआ एक अकाट्य तर्क है। उसे काउंटर करना ना मुमकिन है।

4)- अपनी समस्याओं का सम्मान करते हुए उनको हराना मनुष्य का उच्चतम गुण है। ऐसा करते हुए मनुष्य सकारात्मकता और जिजीविषा की मिश्रित परिभाषा गढ़ता है। राफेल नडाल पिछले कई सालों से यही कर रहे हैं। 

5)- निर्माण की गुणवत्ता आधारशिला की गुणवत्ता के अनुक्रमानुपाती होती है। कुछ अनोखा करने की पहली बड़ी शर्त अनोखी आधारशिला है। हमें यह स्वीकार करना ही होगा कि किरियस के अनोखे होने में भी उनकी आधार शिला का बहुत बड़ा योगदान है।

6)- प्रकृति अपने अद्भुत विषयों को लेकर क्रूर है - हालांकि यह क्रूरता अपने परिणाम में सकारात्मक होती है। बड़ी चोट से जूझ रहे ज्वेरेव भी प्रकृति के अद्भुत विषयों में से एक है।

7)- उम्र कुशलता का मानक हो सकती है - लेकिन गुण की उपस्थिति से इसका कोई लेना देना नहीं है। शेफाली वर्मा इस वाक्य की आदर्श तम प्रतिनिधि बनकर उभरी हैं। 


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