Novak Djokovic, Always finds a way


Novak Djokovic, Always finds a way

जोकोविच को कितना भी ब्रश करता रहूंँ वो स्पष्ट नहीं होते बल्कि और भी अस्पष्ट होते जाते हैं। इसके बावजूद मैं लगातार आनंद में गोते लगाता रहता हूंँ। मिलान कुंदेरा ने बिल्कुल ठीक कहा है , " जितनी अधिक अस्पष्टता होगी, आनंद उतना ही अधिक होगा।" 
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विंबलडन की पुरुष प्रतियोगिता का चौथा दौर चल रहा है।जोकोविच और ह्यूबर्ट हरकाज़ दो -दो हाथ कर रहे हैं। जोकोविच कड़ी मशक़्क़त के बाद शुरुआती 2 सेट जीतने में कामयाब रहे हैं।
तीसरे सेट में 5-6 से पीछे चल रहे हैं।
अपनी सर्विस गेम में हैं और 15-30 से पीछे चल रहे हैं। 
वो पहली सर्व(फर्स्ट सर्व) हरकाज़ के दाहिनी ओर कोर्ट के बीच में (टी प्वाइंट) करते हैं। 
अंपायर ऑउट की कॉल करती हैं।
अब जोकोविक के सामने एक सिचुएशन है। 
वो अपनी सर्विस गेम के साथ साथ इस सेट में भी पीछे हैं। 
और अब उनकी दूसरी या'नी आख़िरी सर्व बची हुई है।
सवाल यह है कि वो कहांँ सर्व करेंगे?
आम तौर पर ऐसी सिचुएशन में एक आम सर्व करके डबल फ़ाॅल्ट का ख़तरा टालना सबसे अच्छा विकल्प रहता है।
सबकी तरह ह्यूबर्ट भी यही सोच रहे होंगे। 
लेकिन यह क्या!
जोकोविच ने दुबारा बीच में ही सर्व किया है!
कमाल है!
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जोकोविच जैसे खिलाड़ी स्किल्स मात्र के पुतले नहीं हैं। उनमें जोख़िम लेने की हिम्मत है। उनमें सब कुछ नियमत: करते हुए भी कुछ न कुछ अलग करने का हौसला है। समय को टूल की तरह अपने हित में प्रयोग करना इनके अभ्यास का हिस्सा है। अपने खेल के बारे में नित नई धारणा की स्थापना उनकी दिनचर्या बन चुकी है। और तो और जोकोविच ने 'धता बता देना' जैसे मुहावरे का इस्तेमाल उम्र के साथ करके दिखाया है। 
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पिछले कुछेक दिनों में जोकोविच और उनके खेल ने मेरी स्याह दुनिया में रंग घोले हैं। उनके विश्वास को फलित होते हुए देखकर मेरा ख़ुद पर विश्वास बढ़ा है। ज़िंदगी के किसी भी पड़ाव पर जोकोविच और उनकी यात्रा का ख़्याल मुझे हिम्मत देने के लिए काफ़ी है। उन्होंने एक ऐसा क़र्ज़ चढ़ाया है जो शायद किसी भी तरह से चुकाया न जा सके।


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