खेलों में कुछ भी अचानक नहीं होता

"तेज़ हो जाएँ इस का तो इम्कान है
आँधियाँ अब रुकें, ऐसा लगता नहीं"
- आशुफ़्ता चंगेज़ी

 दर्ज कर लेने की बौखलाहट जीत लेने (की बौखलाहट) जैसी ही होती है। जहांँ आप, जल्द अज़ जल्द सारा क़िस्सा चंद लफ़्ज़ों में समेट लेना चाहते हैं। वहीं, मैदान पर खिलाड़ियों को मैच ख़त्म करने की जल्दी रहती है ।

 हालांँकि कई मारके आसानी से सर नहीं होते। हर तरह की कोशिश मिट्टी हो जाती है। लेकिन एक ऐसा भी दिन आता है जब आप सब कुछ अपने हिसाब से लिखते हैं। खिलाड़ी, खेल की हर शक्ल अपने मन मुताबिक़ तय करता है। 

 अफ़ग़ानिस्तान, नीदरलैंड्स और ह्यूबर्ट हरकाज़ के लिए पिछला हफ़्ता इसी दिन की तरह गुज़रा है। उनके लिए, खेल का एक-एक पल, एक-एक दांँव, पहले से बीता हुआ - पहले से खेला हुआ लग रहा था।
 तीनों मैच से पहले लेस फेवरिस्ट्स और मैच के दौरान मोर प्रिपेयर्ड थे। तीनों के सामने बड़ी - बड़ी चुनौतियांँ थीं। तीनों ने अपना सबसे अच्छा खेल खेला और जीत हासिल की।

 तीनों की जीत अपनी अपनी जगह पर एक 'स्टेटमेंट' है। जाते हुए साल में तीनो ने अपने लिए एक 'मोमेंट' जीता है। 

 हरकाज़ शंघाई मास्टर्स के चैंपियन बन गए। अफ़ग़ानिस्तान और नीडरलैंड्स ने पॉइंट्स टेबल को रोचक बना दिया है। जहांँ, हरकेज के लिए यह साल लगभग ख़त्म हो चुका है। वहीं, यह देखना दिलचस्प होगा कि अफ़ग़ानिस्तान और नीदरलैंडस का ऊंँट किस करवट बैठता है! 

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