बदलते हुए किरियस
बदलते हुए किरियस
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जैसे कोई शोर मचाता हुआ, हंँसता-गाता हुआ, इधर से उधर दौड़ लगाता हुआ, उधम मचाता हुआ, पटकता- तोड़ता हुआ बच्चा बड़ा हो जाए, जैसे हिलोरे मारती हुई - उफनती हुई नदी समंदर में मिल जाने के बाद शान्त हो जाए, जैसे अचानक उठने वाली आंँधी धीरे धीरे दायम हवा की शक्ल में बदल जाए - लगभग 10 साल की प्रोफ़ेशनल टेनिस के बाद निक किरियस भी अपने होने में सबसे बेहतर हो रहे हैं। इतनी प्रतिभा होने के बावजूद निक को इतना पीछे देखना दुःखी कर देता था।उनका ऑन कोर्ट अप्रोच काफ़ी बचकाना रहता था।
कई लोगों का मानना है कि उनकी टेनिस का सारा दृष्टिकोण एंजॉय करने के आस पास का है, लेकिन यह उनका भ्रम है। मेरा हमेशा से यह मानना रहा है कि खेल और खिलाड़ी एक दूसरे को चुनते हैं। निक किरियस ने टेनिस को और टेनिस ने निक किरियस को चुना है। अव्वल तो यह कि किसी भी स्पोर्ट्स को उसके पसंद करने वालों के लिए खेलना उसमें जीतने से बड़ा दर्जा है, जो निक सालों से करते आ रहे हैं। दूसरा यह कि वो भी ग्रैंडस्लैम जीतना चाहते होंगे, वो भी चाहते होंगे कि दुनिया उन्हें एंटरटेनर के साथ- साथ एक चैंपियन की शक्ल में भी याद रखे।
सनद रहे कि वो सिर्फ़ एंटरटेनर कभी नहीं थे।अगर थे भी तो अब नहीं रहे। अब वो बड़े हो चुके हैं। समंदर में मिल चुके हैं। हवा बन चुके हैं। अब वो चैंपियन बनने की राह पर है। फिलहाल वो विंबलडन का क्वार्टर फ़ाइनल खेलेंगे। पिछले 7 सालों में निक का यह पहला ग्रैंडस्लैम क्वार्टर फ़ाइनल होगा।
- उत्कर्ष सिंह
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