स्वप्न, प्रकृति, जीवन, यात्राएंँ और यह फ़ाइनल






स्वप्न, प्रकृति, जीवन, यात्राएंँ और यह फ़ाइनल 


1) स्वप्न' ऐसे शब्द को अर्थ देने के लिए कितनी लंबी यात्राएंँ करनी पड़ती है। कितने पहाड़ चढ़ने होते हैं। कितनी नदियों में उतरना होता है। हिंदी शब्दकोष में शायद ही कोई दूसरा शब्द हो जिसको अर्थ देने में इतनी साधना लगे। परिस्थितियों में असमानताओं के बावजूद, मेस्सी की यात्रा को पेले के समकक्ष रखना अनुचित न होगा।

2) प्रकृति का हर अवयव समान रूप से दर्शनीय है। उजले और उदास दोनों तरह के अवयवों में अद्वितीय मौलिक सुंदरता निहित है। किंतु प्रकृति के कुछ अवयव वाद - विवाद और वर्गीकरण की सीमा से परे हैं। मेस्सी और रोनाल्डो उन्हीं अवयवों में से हैं। 


3) जीवन में गति न हो तो मृत्यु बहलाने लगती है। गति अधिक हो तो जीवन मृत्यु के चक्र से बाहर निकल जाता है। जीत जाना या जीतते रहना अगर जीवन है और हार जाना या हारते रहना मृत्यु तो मबापे कहांँ हैं? सारी परिभाषाएंँ पाठक मन की विवेचना पर आश्रित हैं। मुझे भ्रम है कि म्बापे जीवन का सबसे सटीक विंब न हों, गतिमान होते हुए स्थैतिक और स्थैतिक होते हुए गतिमान। 


4) जीवन भी 105 ' 68 का मैदान है। विपदाओं को अपने गोलपोस्ट से दूर रखना मुश्किल काम है। म्बापे जैसी विपदा, कितनी भी कोशिश कर लें, हाथ चूमकर जीवन में दर्ज हो हीजाती है। लेकिन निर्णायक भूमिका उन विपदाओं की है जिन्हें हम कम आंँकते हैं। उन्हें रोककर ही मैदान मारा जा सकता है। अर्जेंटीना के मार्टिनेज़ इसके जीवंत उदाहरण हैं। 

5)- लंबी यात्राओं में सह यात्री ईंधन हैं। उनका संग-साथ चलते रहने की प्रेरणा देता है। एक विश्वसनीय सह यात्री का साथ मन को आराम करने का विश्वास दिलाता है। डी मारिया, अल्वारेज़, मार्टिनेज़, डी पॉल और डिबाला सहित अन्य सभी ने विश्वसनीय साथी होने के सभी धर्म निभा दिए हैं। मेस्सी अब आराम कर सकते हैं। 

6)- जीत और हार के बीच एक बहुत पतली पट्टी 'संघर्ष' की है। जीत और हार के औपचारिक सत्यापन के बाद हम संघर्ष को भूल जाते हैं। संघर्ष को भूल जाना परिणाम जानने के आवेश में किया हुआ पाप है। गोलकीपर और फॉरवर्ड के ठीक बीच मिडफील्डर खेलते हैं। एंजो फर्नांडेज और ग्रीज़मैन को भूलना पाप होगा।


इस पूरे विश्व कप और इस फ़ाइनल पर लिखने, समझने और बात करने के लिए पूरी उम्र पड़ी है। फिलहाल आंँख में उमड़ रही नींद का सम्मान करना उचित रहेगा। सज्जन इसे बच निकलने का बहाना मानेंगे लेकिन नींद का सम्मान करने के पीछे ' कुछ लिख न पाने की असमर्थता' भी है। जिस क्षण की प्रतीक्षा बरसों तक की हो - उसके घटित होने के बाद रोने और आश्चर्य करते रहने के इतर भी कोई विकल्प है?

इस विश्व कप के सभी खिलाड़ियों को एक साथ दर्ज करना हो तो 1986 के माराडोना को दर्ज करते हुए सुशोभित के लिखे हुए इस अंश , 'नियति जिस व्यक्ति को सामूहिकता के उन्माद से भरे ऐसे क्षणों के लिए चुनती है, वह साधारण नहीं होता, उसके माध्यम से आदिम शक्तियांँ स्वयं को वयक्त करती हैं।' को थोड़े से बदलाव के साथ ' नियति जिन व्यक्तियों को सामूहिकता के उन्माद से भरे ऐसे क्षणों के लिए चुनती है, वे साधारण नहीं होते, उनके माध्यम से आदिम शक्तियांँ स्वयं को वयक्त करती हैं।' लिख लिया जाए तो शायद काम चल जाए।


अर्जेंटीनी कवि हारहे लुईस बोरहेस से अधिकार के साथ उधार लेते हुए: 
' However, there is something that stays'

Comments

Popular posts from this blog

बची रहेगी मानव सभ्यता,किसी एक खेल के बचे रहने से

e-Sports : The Change Is Here

नीरज// फूल खिला है