म्बापे, नोवाक और रोजर




1) अभ्यस्त - किलियन म्बापे

प्रकृति अदृश्य होते हुए भी दृश्यमान है। इसके कई घटक है, जिनमें इंसान सबसे अधिक मूर्त है। प्रकृति इंसान को अपनी गोंद में पालती है, अपने सीने पर चलने का अभ्यास कराती है और अपने आकाश में उड़ने का अवसर करती है। इंसानी दृष्टिकोण से, इन तीनों क्रियाओं में द्वितीय क्रिया सबसे अधिक आवश्यक और तृतीय सबसे अधिक आंदोलन पूर्ण है। प्रथम क्रिया को मूल अधिकार की श्रेणी में रखना उचित होगा।

म्बापे ने द्वितीय और तृतीय क्रिया को अपनी दिनचर्या में समो लिया है। चलने का अभ्यास निरंतर करते रहने से अब वो दौड़ने लगे हैं और लगातार दौड़ते रहने से, पृथ्वी का खुला मैदान उनके लिए आकाश हो गया है।

ज़मीन पर बराबर क़दम रखते हुए भी उड़ा जा सकता है, म्बापे इस सूत्र के प्रवर्तक बनकर उभरे हैं।

2) चमचमाता हुआ देवता : रोजर फ़ेडरर

संभव है कि हमारे लिए किसी देवता की कल्पना करना मुश्किल कार्य होता, लेकिन हम भाग्यशाली हैं कि हमारे पास रोजर हैं। घुंँघराले बाल, तेज़ चमकता माथा, लम्बे हाथ, गठीले पैर और सुडौल कंधो से लगी हुई एक लम्बी गर्दन - मूर्तिकार देवताओं को ऐसी ही शारीरिक बनावट प्रदान करना चाहता है। फ़ेडरर को जिस मूर्तिकार ने बनाया, वो भी देवता ही बना रहा था। 

ऐसा देवता जो टेनिस प्रशंसकों में पूजा गया, जिसके विश्वविजयी होने पर व्रत रक्खे गए और जिसके जाने पर ज़ार ज़ार रोया गया। लेकिन किवदंतियों की मानें तो देवता कभी विदा नहीं होते। वे अपनी दुनिया के कण - कण में सांस ले रहे होते हैं। वे अपनी दुनिया के प्रत्येक प्राणी की हर गतिविधि में गतिमान रहते हैं। 

अगर मेरे लिखे - कहे में रोजर जैसा डिवाइन ग्रेस बिल्कुल भी न नज़र आया तो मैं भी यह मान लूँगा कि देवता सचमुच चले जाते हैं।


3)- समकालीनता, एक श्राप - नोवाक जोकोविक

एक जंगल में दो शेर नहीं हो सकते, एक राज्य में दो राजा नहीं हो सकते - एक म्यान में दो तलवारें नहीं रह सकतीं जैसे जुमलों की बुनियाद ही ग़लत है। बहुत ध्यान से न भी सोचें तो यह अर्थ निकल ही आता है कि ये सारे वाक्य Monopoly के प्रचारक हैं। Monopoly का समर्थन करना निरंकुशता का समर्थन करना है। तो क्या टेनिस जगत का एक बहुत बड़ा हिस्सा निरंकुशता का समर्थक है?

खुले समाज का आशय एक ऐसे समाज से होता है - जहांँ लिंग, जाति, धर्म आदि के आधार पर किसी से भेदभाव न किया जाता हो। टेनिस समाज एक आदर्श खुले समाज का उदाहरण तो नहीं ही है क्योंकि नोवाक का नाम भर लेने से इस तथ्य की धज्जियाँ उड़ जाती हैं। 

लय, तेज़ी, पकड़, एलिगेंस, ग्रेस - वह कौन सा ऐसा गुण है जो नोवाक में दम नहीं भरता है। लेकिन प्रशंसकों का एक बहुत बड़ा समूह उन्हें सिर्फ़ इसलिए पसंद नहीं करता है क्योंकि वो रोजर के युग में खेले/ खेलते हैं।

मानव सभ्यता हमेशा से सिर्फ़ एक को चुनती हुई आई है। यही इसके आरम्भ कारण बना, यही इसके विकास का कारण बना और यही इसके अंत का कारण बनेगा।

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