दूसरा टेस्ट : बादल को घिरते देखा है

दूसरा टेस्ट, पहला दिन : तमाशा मेरे आगे 
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भारतीय टीम पहला मैच पारी से हारी थी। ऐसी स्तिथि में दबाव महसूस करना स्वाभाविक था। प्री मैच कांफ्रेंस में सब दम भरते हैं : रोहित भी वही कर रहे थे। लेकिन मैच जब शुरू हुआ तब समझ आया कि रोहित सिर्फ़ दम नहीं भर रहे थे। उनकी टीम हर हालत में जीतने ही आई थी। वैसे भी , अगर सिराज की गेंद सही जगह गिरने लग जाए तो यह भी फ़ैक्ट है कि विकेट्स निकलते देर नहीं लगती है। एक छोर से सिराज तो दूसरे छोर से बुमराह और मुकेश, अफ़्रीकी बल्लेबाज़ों पर टूट गिरे। अफ़्रीकी पारी नाटकीय ढंग से 55 रनों पर ढेर हो गई। 

अब भारतीय टीम बल्लेबाज़ी करने उतर रही थी। पिच का रवैय्या सभी देख चुके थे। सब को ख़बर थी कि यह पारी भी बहुत लंबी नहीं होने वाली है। लेकिन रोहित शर्मा को कानो - कान भी ख़बर नहीं थी। उन्होंने बल्लेबाज़ी शुरू की तो लगा कि यह टिपिकल अफ़्रीकन पिच है - जिसकी उछाल और गति पर भरोसा किया जा सकता है। हालांँकि दूसरी तरफ़ से ऐसा बिल्कुल भी नहीं था। सभी खिलाड़ी इस पिच पर असहज महसूस कर रहे थे। कोहली को भी शुरू में थोड़ी परेशानी हुई लेकिन हमेशा की तरह उन्होंने अपना रास्ता बना लिया। जब लगने लगा कि अब भारतीय टीम एक बड़ी बढ़त बना लेगी तभी भारत के सभी बल्लेबाज़ ‘ जबीं सजदा करते ही करते गई ‘ की तर्ज़ पर ‘ हक़े - बंदगी ‘ अदा करने लग गए। आख़िरी 11 गेंदों में 6 बल्लेबाज़ बिना कोई रन जोड़े वापिस चले गए। भारतीय पारी भी नाटकीय ढंग से 153 पर सिमट गई। 

अब अफ़्रीका दूसरी पारी खेलने उतरी। मारक्रम और एल्गर ने बहुत शानदार शुरुआत की और शुरुआती 10 ओवर में 35 रन जोड़ दिए। लगा कि दूसरी पारी ‘दूसरी’ होने वाली है। लेकिन तभी मुकेश कुमार की बहुत अच्छी गेंद पर एल्गर आख़िरी बार ऑउट हुए। कोहली ने पहली स्लिप में उनका कैच पकड़ा और बाहर इशारा किया कि एल्गर की आख़िरी वॉक को रेस्पेक्ट दिया जाए। सभी भारतीय खिलाड़ी बारी - बारी एल्गर से मिले और उन्हें विदाई दी। इधर एक तरफ़ मारक्रम खेलते रहे और दूसरी तरफ़ दो और विकेट गिरे। पहला दिन ख़त्म हो चुका था और अफ़्रीका दूसरी पारी में 62 रन बनाकर 3 विकेट गंँवा चुकी थी। 

दूसरा टेस्ट, दूसरा दिन : बादल को घिरते देखा है 
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दूसरा दिन शुरू हुआ और विकेट गिरने का सिलसिला ब - दस्तूर जारी रहा। देखते-देखते बुमराह ने 5 विकेट झटक लिए और मार्क्रम ने शतक बना दिया। ऐसी पिच पर 5 विकेट लेना असाधारण नहीं था लेकिन मार्क्रम का शतक असाधारण था। उन्होंने अलग इंटेंट दिखाया। सहजता का पर्याय हो चुके थे। आगे की गेंदो को तगड़े से ड्राइव किया और पीछे की गेंदों पर तेज़ कट मारे। अच्छी गेंदों को सम्मान भी दिया। लेकिन वो अकेले पड़ गए। उनके शतक के बावजूद अफ़्रीका सिर्फ़ 79 का लक्ष्य दे पाई। 

भारतीय टीम बल्लेबाज़ी करने आई। यशस्वी जायसवाल ने पहली ही गेंद पर ज़ोरदार पुल मारा। इसी पुल के साथ उन्होंने अपनी मंशा ज़ाहिर कर दी थी। वो इसी तरह से खेलने वाले थे। वो इसी तरह से खेले। उन्होंने अपनी छोटी सी पारी में बहुत अच्छी स्ट्रोक मेकिंग की। अचानक से वही पिच आसान दिखने लग गई थी। यशस्वी ऑउट हुए तो रोहित , शुभ मन और कोहली ने भी इंटेंट बनाए रखा और भारतीय टीम आसानी से मैच जीत गई। 

इस जीत पर रोहित शर्मा का रिएक्शन देखने लायक़ थे। वो इस जीत का महत्व समझ रहे थे। उनकी आँखे एक अरसे बाद खिल उठीं थीं। मैं ठीक-ठीक कह सकता हूंँ कि मैंने उस एक पल में उनके माथे पर उम्मीद के नए ‘बादल को घिरते देखा है ‘। 

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