स्टोक्स और जडेजा
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टेस्ट क्रिकेट की प्रकृति में समय के साथ बदलाव हुए हैं। अलग अलग क्रम पर खेलने वाले बल्लेबाज़ों की भूमिकाएंँ बदल गईं। गेंदबाज़ों के साथ भी कमोबेश ऐसा ही हुआ। लेकिन हर फन मौला खिलाडियों की भूमिका इस बदलाव से कोसों दूर है। हरफ़न मौला खिलाड़ी आज भी पांँचवे गेंदबाज़ और सातवें बल्लेबाज़ की भूमिका में है।
स्टोक्स और जडेजा हरफ़न मौला शब्दकोष के शुरुआती दो नाम हैं। बल्लेबाज़ी की बात करें तो दोनों बाएंँ हाथ के बल्लेबाज़ हैं। दोनों मूल रूप से आक्रमक हैं लेकिन समय - समय पर रक्षात्मकता को भी साधते रहते हैं। दोनों फ्रंटफुट पर अच्छा खेलते हैं । छोटी गेंदों पर स्टोक्स ज़्यादा सहज हैं। कट दोनों अच्छा खेलते हैं लेकिन जडेजा का कट अधिक दर्शनीय है। गेंदबाज़ी की बात करें तो स्टोक्स दाहिने हाथ के मीडियम पेसर हैं। जडेजा बाएं हाथ के ऑर्थोडॉक्स स्पिनर हैं। दोनों अपनी अपनी प्रकृति के शानदार गेंदबाज़ हैं। स्टोक्स आज कल गेंदबाज़ी नहीं कर रहे हैं वही जडेजा लगातार गेंदबाज़ी कर रहे हैं। क्षेत्ररक्षण में दोनों लगभग एक जैसे हैं। ग्राउंड फील्डिंग में जडेजा थोड़े बेहतर हैं तो कैचिंग में स्टोक्स का पलड़ा भारी है।
दुनिया की किसी भी टेस्ट टीम में ऐसे खिलाडियों का होना ज़रूरी है। ऐसे खिलाडियों के बग़ैर एक अच्छी टेस्ट टीम की कल्पना ही नहीं की जा सकती। तमाम क्रिकेटिंग वर्ल्ड ऐसे खिलाडियों में निवेश कर रहा है। मार्श, ग्रीन, डैरी मिचेल, रचिन, यानसन, आघा सलमान, जेसन होल्डर जैसे खिलाडियों के होने से यह सूची समृद्ध है। टेस्ट क्रिकेट समृद्ध है।
- उत्कर्ष
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