न खिलाड़ी हारता है, न खेल
सिनर हर एक रिटर्न के बाद विपक्षी खिलाड़ी की ओर बढ़ते रहते हैं। ऐसा करने से उनके रिटर्न में तेज़ी आती है और विपक्षी खिलाड़ी को मुश्किल होती है। वो लम्बी रैलियों में पीछे रहकर भी खेलते हैं। पीछे रहकर डीप रिटर्न्स करते हैं जिस से विपक्षी खिलाड़ी को शॉट मेकिंग में परेशानी होती है। अपने खेल में ऐसी तकनीकी निरंतरता सिनर को ख़ास बनाती है। कार्लोस अल्कराज ने सिनर की मेलबर्न जीत पर लिखा है - ‘तुम्हारे लिए बहुत खुश हूंँ, तुम इस ट्रॉफी के सच्चे हक़दार हो, बधाई मेरे दोस्त ‘। यहांँ कार्लोस और सिनर की तुलना जैसा कुछ नहीं हैं लेकिन सिनर की नियमितता ही उन्हें हार्ड कोर्ट पर कार्लोस और 'बाक़ी खिलाड़ियों' से बेहतर बनाती है।
मेदवदेव और समय
'बाक़ी खिलाड़ियों' में मेदवेदेव नहीं हैं। मेदवदेव 4 बार ग्रैंड स्लैम चैंपियन होते होते रह गए हैं। वो इसलिए नहीं हारते कि उनका खेल किसी भी तरह से कमज़ोर है। बैक हैंड पर बहुत अच्छे हैं। लंबी रैली में सहज रहते हैं। फोरहैंड भी बुरा नहीं है। सर्व अच्छी करते हैं। मेरे जानने में, हार्ड कोर्ट पर मेदवदेव जैसा खेल किसी के पास नहीं है। यहांँ तक कि नोवाक जोकोविच जैसा खिलाडी भी हार्ड कोर्ट पर उनका लोहा मानता है। मेदवदेव समय के कुचक्र में फंँसे हुए हैं। मेदवदेव अपनी पिछली पीढ़ी, अपने साथ की पीढ़ी और अपने बाद की पीढ़ी के बीच सैंडविच हो गए हैं । वो किस वज्ह से हारते हैं - इसका जवाब शायद समय के पास हो। लेकिन हम जैसे देखने - सुनने वालो को “सुख दुखे समे कृत्वा” मेदवदेव हमेशा याद रहेंगे।
शमार जोसेफ़ और दो आउटसाइडर्स
शमार जोसेफ़ का नाम इस वक़्त सब की ज़बान पर है। पूरी दुनिया उनके अंँगूठे की हालत से बे ख़बर और उनकी शानदार गेंदबाज़ी से बा ख़बर रहना चाहती है। शमार जोसेफ़ वाक़ई एक शानदार खिलाड़ी हैं और उन्होनें अपनी क़ाबिलियत के दम पर यह सब कुछ किया है। लेकिन इस मौके पर क़ाबिलियत को पहचानने वालों का ज़िक्र भी ज़रूरी है। इमरान ताहिर सीपीएल 2023 में गुयाना के कप्तान बने। दक्षिण अफ़्रीकी टीम के लिए एनलिस्ट रह चुके प्रसन्ना को इमरान ने बुलावा भेजा । प्रसन्ना बतौर परफॉर्मेंस एनलिस्ट गुयाना की टीम से जुड़े। और उधर शमार जोसेफ़ गुयाना के लिए नेट बॉलर बनकर आए । प्रसन्ना ने उन को देखा और इमरान से गुज़ारिश की कि इस लड़के को फुल कॉन्ट्रैक्ट दिया जाए। इमरान ने अपने पुराने दोस्त पर झट से भरोसा किया और शमार गुयाना की टीम में आ गए। दिन ब दिन शमार बेहतर होते चले गए और आज शमार को पूरी दुनिया जानती है।
स्मिथ और क्रिकेट
स्मिथ क्रिकेट में मानसिक प्रतिरोधात्मकता के सबसे विकसित प्रतिमान हैं। उम्र के जिस पड़ाव पर खिलाड़ी जैसे - तैसे खेलता रहना चाहता है, स्मिथ नए प्रयोगों का स्वागत करते हैं। टीम में जगह और फ़ॉर्म जैसी चिंताओं को चिता समान जानकर त्याग देते हैं। 4 नंबर की जमी जमाई व्यवस्था को छोड़कर टीम के लिए ओपन करने आते हैं। शुरुआती पारियों में असफल भी रहते हैं। लेकिन क्रिकेट में ‘लॉ ऑफ़ एवरेजेस’ ख़ूब काम करता है। इस बार स्मिथ इसी लॉ ऑफ़ एवरेजेस के ‘सु -चक्र’ में आ जाते हैं। एक तरफ़ शमार जोसेफ़ उनके साथी खिलाडियों को वापिस भेज रहे होते हैं। दूसरी तरफ़ स्मिथ डटे रहते हैं। स्मिथ नाबाद लौटते हैं। टीम हार जाती है। क्रिकेट जीत जाता है।
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